सहारनपुर में पेट्रोल पंपों की कार्यप्रणाली पर सवाल, छापेमारी में लाइसेंस एक्सपायर मिला; तेल बिक्री पर रोक

सहारनपुर में पेट्रोल पंपों की कार्यप्रणाली पर सवाल

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पेट्रोल पंपों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपभोक्ताओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए निर्धारित नियमों के पालन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी बीच बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप कुमार ने जिलापूर्ति अधिकारी के साथ दिल्ली रोड स्थित एक पेट्रोल पंप पर छापेमारी की। पेट्रोल और डीजल में मिलावट तथा घटतौली की शिकायत के बाद हुई जांच में माप-तौल और तेल की गुणवत्ता सही पाई गई, लेकिन पेट्रोल पंप का लाइसेंस दिसंबर 2025 में ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद वहां तेल की आपूर्ति और बिक्री जारी थी। जांच के बाद प्रशासन ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर रोक लगा दी।

सहारनपुर में पेट्रोल पंपों की कार्यप्रणाली पर सवाल

सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप कुमार ने बताया कि पेट्रोल पंप पर पेट्रोल-डीजल में मिलावट और घटतौली की शिकायत मिली थी। शिकायत के आधार पर जांच टीम जिलापूर्ति अधिकारी के साथ मौके पर पहुंची। जांच के दौरान पेट्रोल और डीजल की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाई गई और माप-तौल में भी किसी तरह की गड़बड़ी नहीं मिली। हालांकि, जांच में सामने आया कि पेट्रोल पंप का लाइसेंस दिसंबर 2025 में समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद पेट्रोल पंप पर तेल की बिक्री और आपूर्ति जारी थी। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से तेल के विक्रय पर रोक लगा दी है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी शिकायत मिलने पर दोबारा जांच की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कई पंपों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव

सहारनपुर जिले में पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को निर्धारित मानकों के अनुसार सुविधाएं नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। लोगों का आरोप है कि कई पेट्रोल पंपों पर स्वच्छ पेयजल, शौचालय, एयर कंप्रेशर और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

उपभोक्ताओं का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर मिलने वाली कई सुविधाएं सरकारी नियमों और निर्देशों में तो दर्ज हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन हर जगह दिखाई नहीं देता। इससे खासतौर पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल

पेट्रोल पंप बेहद संवेदनशील स्थान माने जाते हैं, जहां सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है। इसके बावजूद कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्ड और अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

इसके अलावा पेट्रोल पंपों पर ‘नो स्मोकिंग’ और मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़े चेतावनी बोर्ड भी पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं देते। विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोलियम पदार्थों के कारण ऐसे स्थानों पर छोटी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का रूप ले सकती है। ऐसे में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच जरूरी है।

उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत तेल की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर

वाहन चालकों की सबसे बड़ी चिंता पेट्रोल और डीजल की गुणवत्ता तथा मात्रा को लेकर रहती है। कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें निर्धारित मात्रा में ईंधन नहीं मिलता, जबकि कुछ लोग तेल की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाते हैं।

ग्राहकों का कहना है कि कई बार टंकी फुल कराने के बावजूद वाहन अपेक्षा के अनुरूप माइलेज नहीं देता और जल्दी रिजर्व में पहुंच जाता है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए नियमित और वैज्ञानिक जांच जरूरी है। प्रशासन द्वारा की गई हालिया जांच में संबंधित पेट्रोल पंप पर तेल की गुणवत्ता और माप-तौल सही पाई गई है।

शिकायत दर्ज कराने की सुविधा पर भी सवाल

पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं की शिकायत दर्ज करने के लिए कंप्लेंट बुक उपलब्ध कराने का प्रावधान है। लेकिन कुछ ग्राहकों का आरोप है कि शिकायत पुस्तिका मांगने पर उन्हें आसानी से उपलब्ध नहीं कराई जाती। इससे उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज नहीं करा पाते।

इसके अलावा इमरजेंसी कॉल सुविधा और फर्स्ट एड बॉक्स जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर भी कई जगह शिकायतें सामने आती हैं। लोगों का कहना है कि जहां फर्स्ट एड बॉक्स मौजूद हैं, वहां भी कई बार आवश्यक दवाएं और प्राथमिक उपचार की सामग्री उपलब्ध नहीं होती।

नियमित जांच की जरूरत

पेट्रोल पंपों की नियमित जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि अगर प्रशासन, तेल कंपनियों और संबंधित विभागों की ओर से नियमित निरीक्षण किया जाए तो नियमों की अनदेखी पर समय रहते कार्रवाई की जा सकती है।

दिल्ली रोड स्थित पेट्रोल पंप पर हुई कार्रवाई के बाद अब सवाल यह है कि क्या जिले के अन्य पेट्रोल पंपों की भी इसी तरह जांच की जाएगी? प्रशासन की कार्रवाई से यह साफ है कि नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई संभव है। ऐसे में जरूरत है कि पेट्रोल पंपों पर लाइसेंस, तेल की गुणवत्ता, माप-तौल, सुरक्षा व्यवस्था और उपभोक्ता सुविधाओं की नियमित जांच हो, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

फिलहाल, एक पेट्रोल पंप पर लाइसेंस समाप्त होने के बावजूद तेल की बिक्री जारी रहने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन की कार्रवाई चर्चा में है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य पेट्रोल पंपों को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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